Bihar Monsoon Report: विदा हुआ मानसून, लेकिन बिहार में बारिश की कमी ने बढ़ाई किसानों की चिंता
मौसम विभाग के आंकड़े: बिहार के 24 जिलों में सामान्य से 25% से 40% कम वर्षा, धान की फसल और भूजल स्तर पर असर।
### 'मानसून आया भी और चला भी गया, लेकिन खेत प्यासे ही रह गए'
बिहार में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई औपचारिक रूप से हो चुकी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD पटना) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, इस सीज़न में राज्य भर में सामान्य से लगभग 28% कम मानसूनी बारिश दर्ज की गई है।
सबसे बुरा असर दक्षिण बिहार के जिलों जैसे गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, रोहतास और नवादा में देखने को मिला है, जहां कई प्रखंडों में वर्षा की कमी 35% से 45% तक पहुंच गई।
प्रमुख ग्राउंड बिंदु: - **धान की फसल:** देरी से हुई बारिश के कारण रोपाई प्रभावित हुई, और अब बाली निकलने के समय वर्षा न होने से पैदावार पर 20-30% असर पड़ने का अंदेशा है। - **भूजल स्तर (Water Table):** कम वर्षा के चलते कई क्षेत्रों में बोरवेल और चापाकलों का जलस्तर नीचे खिसक रहा है। - **डीजल अनुदान योजना:** राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए सिंचाई हेतु डीजल अनुदान की प्रक्रिया तेज़ करने के निर्देश दिए हैं।
"अगर समय पर नहरों में पानी और बिजली की निर्बाध आपूर्ति नहीं मिली तो रबी और गेहूं की बुवाई में भारी संकट आ सकता है।" — रामबली महतो, किसान, भोजपुर
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
बिहार में इस वर्ष किस जिले में सबसे कम बारिश हुई?
मौसम विभाग के अनुसार नवादा और औरंगाबाद जिलों में सामान्य से 40% से अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई।
क्या किसानों को सूखा राहत या सिंचाई अनुदान मिलेगा?
हाँ, राज्य कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर डीजल अनुदान और वैकल्पिक फसल योजना के आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।