Madhubani Art Goes Global: बिहार की लोककला अब टोक्यो, पेरिस और न्यूयॉर्क के फैशन वीक्स में
कैनवस और दीवारों से निकलकर स्नीकर्स, हुडीज और लक्ज़री बैग्स तक पहुंची मिथिला पेंटिंग।
### जितवारपुर से न्यूयॉर्क का सफर
जब मधुबनी जिले के जितवारपुर गांव की रेखा देवी अपने घर के आंगन में प्राकृतिक रंगों से मछली और कोहबर बना रही थीं, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि अगली पीढ़ी इसे डिजिटल टैबलेट पर उकेर कर अंतरराष्ट्रीय फैशन ब्रांड्स के साथ कोलैबोरेट करेगी।
आज बिहार के 20 से अधिक यंग आर्टिस्ट्स अपने इंस्टाग्राम और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए हर महीने अमेरिका, जापान, जर्मनी और फ्रांस में मधुबनी आर्ट से सजे हैंडमेड प्रोडक्ट्स भेज रहे हैं।
कैसे बदली मिथिला पेंटिंग की कहानी? 1. **मॉडर्न मर्चेंडाइज:** कस्टमाइज्ड कैनवस स्नीकर्स, सिल्क स्कार्फ, लैपटॉप स्लीव्स और डायरी कवर्स। 2. **नेचुरल डाई तकनीक:** गोबर, हल्दी, पलाश के फूल और नीम की छाल से तैयार रंगों की पर्यावरण-अनुकूल वैल्यू। 3. **जीआई टैग की ताकत:** ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI Tag) मिलने के बाद खरीदारों का भरोसा कई गुना बढ़ा है।
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